चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वैवाहिक विकल्पों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी भी बालिग व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध विवाह करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि शादी करना है या नहीं, कब करना है और किससे करना है, इसका निर्णय पूरी तरह व्यक्ति का निजी अधिकार है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्राप्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दायरे में आता है।
एमबीए युवती की याचिका पर सुनवाई
यह टिप्पणी जस्टिस दीपक गुप्ता ने एक एमबीए युवती द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान की। युवती ने अदालत को बताया कि वह नौकरी और उच्च शिक्षा के लिए स्वतंत्र रूप से रह रही है, लेकिन उसके माता-पिता, मामा और अन्य रिश्तेदार अपनी पसंद के व्यक्ति से उसका विवाह कराने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं।
शादी से इनकार करने पर मारपीट और प्रताड़ना का आरोप
याचिका में कहा गया कि जब युवती ने प्रस्तावित विवाह से साफ इनकार कर दिया तो उसके साथ कथित रूप से मारपीट, धमकी और मानसिक प्रताड़ना की गई।
युवती के अनुसार, लगभग दो महीने पहले उसे एक बहाने से बुलाकर जबरन उसके पैतृक घर ले जाया गया, जहां परिवार के सदस्यों ने उस पर विवाह के लिए सहमति देने का दबाव बनाया। विरोध करने पर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया तथा गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई।
हालांकि, उसने प्रस्तावित विवाह के लिए अपनी असहमति बरकरार रखी।
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सुरक्षा को लेकर जताई आशंका
युवती ने अदालत को बताया कि परिवार की ओर से लगातार मिल रही धमकियों के कारण उसे अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका है। उसने 10 जून को मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को लिखित शिकायत देकर सुरक्षा और कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन शिकायत पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
इसके बाद उसने अपनी जान, सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
जीवन, गरिमा और स्वायत्तता का अधिकार
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा कि प्रत्येक बालिग व्यक्ति को संविधान के तहत जीवन, स्वतंत्रता, गरिमा, निजता और स्वायत्तता का मौलिक अधिकार प्राप्त है। व्यक्तिगत जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी इसी अधिकार का हिस्सा है।
विवाह के निर्णय में दबाव स्वीकार नहीं
अदालत ने कहा कि विवाह किसी व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तिगत निर्णय होता है और इसमें किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव या जबरदस्ती स्वीकार नहीं की जा सकती।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, "यह तय करना कि कोई व्यक्ति विवाह करेगा या नहीं, कब करेगा और किससे करेगा, उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मूल तत्व है। किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध वैवाहिक संबंध में प्रवेश करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।"
पुलिस को सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश
याचिका का निपटारा करते हुए हाई कोर्ट ने मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या उनके द्वारा अधिकृत सक्षम अधिकारी को निर्देश दिया कि वे युवती की शिकायत पर विचार करें, खतरे के स्तर का आकलन करें और यदि उसकी जान या व्यक्तिगत स्वतंत्रता को वास्तविक खतरा पाया जाता है तो कानून के अनुसार तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में राज्य का दायित्व है कि वह नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करे।



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