मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक अहम मामले में साफ कर दिया कि अगर लड़की बालिग है तो उसे अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने और उसके साथ रहने का पूरा अधिकार है। इसी आधार पर कोर्ट ने बाबिता तोमर की याचिका को खारिज कर दिया। यह मामला बाबिता तोमर की याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी नंदिनी तोमर को अभिषेक शर्मा ने अपने पास जबरन रखा हुआ है। इस पर कोर्ट ने नंदिनी को पेश करने के निर्देश दिए।
मर्जी से विवाह की पुष्टि
सुनवाई के दौरान नंदिनी तोमर खुद कोर्ट में पेश हुईं। पुलिस थाना गोला का मंदिर की सब-इंस्पेक्टर शिखा डंडोतिया नंदिनी को लेकर कोर्ट पहुंचीं। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की बेंच ने नंदिनी से सीधे सवाल किया। इस पर नंदिनी ने साफ कहा कि वह बालिग है और जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर में बीकॉम एलएलबी की पढ़ाई कर रही है। उसने अपनी मर्जी से अभिषेक शर्मा से शादी की है और वह उसके साथ ही रहना चाहती है।
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कोर्ट का निर्णय
अभिषेक शर्मा ने भी कोर्ट में कहा कि उसने नंदिनी से अपनी इच्छा से विवाह किया है और वह उसका पूरा ख्याल रखेगा। उसने यह भी भरोसा दिलाया कि नंदिनी की पढ़ाई जारी रखी जाएगी और उसे किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। दोनों की बात सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि नंदिनी बालिग है और अपनी मर्जी से पति के साथ रहना चाहती है, इसलिए उसे रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अब इस याचिका का कोई मतलब नहीं रह जाता।
'शौर्या दीदी' की जिम्मेदारी
हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि नंदिनी जब चाहे अपने माता-पिता से मिल सकती है और उनके घर आ-जा सकती है। कोर्ट ने इस मामले में सरकारी वकील अंजलि ज्ञानानी और सब-इंस्पेक्टर शिखा डंडोतिया को शौर्या दीदी की जिम्मेदारी भी दी, ताकि वे नंदिनी और उसके परिवार का ध्यान रख सकें।



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