श्योपुर। राजनीति में अक्सर पद मिलने के बाद नेताओं का रहन-सहन और व्यवहार बदल जाता है, लेकिन श्योपुर जिले की आदिवासी नेता गुड्डी बाई आदिवासी ने इस धारणा को गलत साबित किया है। सादगी और ईमानदारी के लिए पहचानी जाने वाली गुड्डी बाई को अब मप्र सरकार ने सहरिया विकास परिषद का अध्यक्ष बनाते हुए कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है।
जनपद सदस्य से कैबिनेट दर्जा तक का सफर
गुड्डी बाई आदिवासी का राजनीतिक सफर संघर्ष और सादगी से भरा रहा है।
• वर्ष 2010 में जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं
• 2015 से 2022 तक जनपद सदस्य रहीं
• लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में रहने के बावजूद उनके दामन पर कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा
• उनकी इस साफ छवि और समर्पण को देखते हुए सरकार ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।
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टिकट नहीं मिला तो लौट आईं खेती और दुकान पर
राजनीति में उतार-चढ़ाव भी उनके जीवन का हिस्सा रहे। जब पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, तो उन्होंने बिना किसी शिकायत के राजनीति से दूरी बना ली और अपने गांव सेसईपुरा में खेती और किराना दुकान संभालने लगीं। यह दौर उनके संघर्ष और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बना।
सादगी भरा निजी जीवन
• सेसईपुरा गांव की रहने वाली गुड्डी बाई केवल 5वीं तक पढ़ी हैं
• 23 साल पहले उनके पति भीमसेन आदिवासी का निधन हो गया था
• एक बेटी और दो बेटों की शादी हो चुकी है
• बच्चे अलग रहते हैं और उन्होंने जीवन की चुनौतियों का सामना खुद किया
• सामाजिक और राजनीतिक योगदान
गुड्डी बाई ने राजनीति से पहले भी समाज सेवा में सक्रिय भूमिका निभाई
• 2006-07: शिक्षक-पालक संघ की अध्यक्ष
• 2009: वन्या रेडियो की अध्यक्ष
• 2010: जिला पंचायत सदस्य के रूप में जीत
• 7 वर्षों तक जिला पंचायत में सक्रिय योगदान
नई जिम्मेदारी मिलने पर गुड्डी बाई ने कहा “यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की हर महिला का है। मैंने पहले भी ईमानदारी से काम किया है और आगे भी पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभाऊंगी।”
क्यों खास है गुड्डी बाई की कहानी?
• बिना विवाद और भ्रष्टाचार के लंबा राजनीतिक सफर
• सत्ता से बाहर होने पर भी जमीन से जुड़ी रहीं
• आदिवासी समाज की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं
सन्दर्भ स्रोत/छाया : ईटीवी भारत
सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क



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