छाया: रागिनी तरडे के फेसबुक अकाउंट से
नर्मदापुरम। गीत, गज़ल और भजनों के जरिये संगीत की दुनिया में अपनी ख़ास पहचान बना चुकी मप्र के नर्मदापुरम की रागिनी तरडे विरासत में मिले संगीत के जरिये अपनी मां जयश्री तरडे (प्रख्यात शास्त्रीय गायिका) के सपनों को पूरा करने जी जान से जुटी हैं। रागिनी बताती हैं कि उनकी मां कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में संगीत की शिक्षिका रहीं। रागिनी को संगीत की शिक्षा उन्हीं से मिली। उनकी रगों में संगीत इतना रच-बस गया कि मां के निधन के बाद उन्होंने इसे ही अपनी ज़िन्दगी बना लिया। मां की इच्छा थी कि नर्मदापुरम में एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो बने और यहां के बच्चों को संगीत की बेहतर तालीम मिलती रहे। उनके इस सपने को पूरा करने रागिनी ने वागिश्वरी संगीत कला केंद्र के नाम से नर्मदापुरम जिले में प्रथम ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग स्टूडियो की स्थापना की। स्टूडियो का शुभारंभ उस्ताद अहमद हुसैन और उस्ताद मोहम्मद हुसैन ने किया था।
रागिनी ने आइटीए एकेडमी मुंबई में भजन सम्राट अनूप जलोटा से प्रशिक्षण लिया है। इसके अलावा संगीत में एसएनडीटी यूनिवर्सिटी (मुंबई) से मास्टर डिग्री प्राप्त की है। वे आकाशवाणी कलाकार भी हैं। अल्प समय में ही 30 से ज़्यादा एल्बम बना चुकी रागिनी मॉरीशस में सात कार्यक्रम कर चुकी हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने वहां सत्य साईं संगठन में प्रख्यात गजल गायक श्री रविराज नासेरी के साथ भी प्रस्तुतियां दी हैं। अपनी गायकी से लोगों का दिल जीतने वाली रागिनी का पहला एल्बम वर्ष 2018 में ‘दिल है किसी के प्यार में’ आया। उसके बाद ‘भजन माता रानी के द्वारे’ और ‘गणपति का मेला’ एल्बम तैयार किये जो आस्था, संस्कार और सत्संग आदि चैनलों पर प्रसारित हुए। उनका प्रेम गीतों से सजा नया एल्बम शीघ्र ही आने वाला है। उन्हें पार्श्व गायिका अलका याग्निक और अभिनेता गुलशन ग्रोवर के हाथों अवार्ड भी मिल चुका है। उन्होंने दूरदर्शन और टीवी कलाकारों के साथ भी काम किया है।
वागीश्वरी संगीत कला केंद्र संचालक के रूप में रागिनी बच्चों को गायन-वादन का प्रशिक्षण दे रही हैं। संस्था के माध्यम से संगीत कार्यक्रमों का आयोजन करती रहती हैं। वे चाहती हैं कि जो कला उनके अंदर है, वह ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचे।
संदर्भ स्रोत: पत्रिका
संपादन: मीडियाटिक डेस्क



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