डॉ. उषा खरे: जिन्होंने नवाचार से बदली सरकारी स्कूल की तस्वीर

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डॉ. उषा खरे: जिन्होंने नवाचार से बदली सरकारी स्कूल की तस्वीर

छाया: डॉ. उषा खरे के फेसबुक अकाउंट से 

मिल चुका है राष्ट्रपति पुरस्कार

फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करती हैं सरकारी स्कूल की छात्राएं

कौन बनेगा करोड़पति में कर्मवीर के रूप में हुई थी शामिल, अभिताभ बच्चन ने भी की तारीफ

कई छात्राओं को बेहतर पदों पर मिली नौकरी तो कोई अन्य क्षेत्रों में कर रही काम

भोपालशिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहीं डॉ. उषा खरे एक सरकारी स्कूल में प्राचार्य हैं, लेकिन उन्होंने सरकारी स्कूल में दी जाने वाली परंपरागत शिक्षा के ढर्रे को बदलते हुए उसे डिजीटल एजुकेशन में तब्दील कर दिया। यह उनके प्रयासों का ही नतीजा है कि आज इस स्कूल की छात्राएं न सिर्फ इलेक्ट्रिक गैजेट (टैबलेट) से पढ़ाई करती हैं, बल्कि कॉन्वेंट स्कूलों के बच्चों की तरह फर्राटेदार अंग्रेजी में बातचीत भी करती हैं।

वर्ष 2011 से भोपाल के जहांगीराबाद के शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्राचार्य के रूप में पदस्थ उषा खरे ने शिक्षा में नवाचार करते हुए स्कूल में डिजीटल एजुकेशन को बढ़ावा दिया है। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रपति  पुरस्कार (नेशनल टीचर अवॉर्ड) से भी सम्मानित किया जा चुका है। वे केबीसी के कर्मवीर स्पेशल एपिसोड में भी नजर आ चुकी हैं इस दौरान फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन ने उनकी तारीफ करते हुए उन्हें कर्मवीर अवॉर्ड से सम्मानित भी किया था

उनकी पदस्थापना के दौरान स्कूल में करीब एक हजार छात्राएं थी। पढ़ाई का तरीका भी परंपरागत था, लेकिन उन्होंने स्कूल में डिजीटल एजुकेशन से पढ़ाई करने पर जोर दिया और इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए सबसे पहले उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट से संपर्क किया। वे बच्चियों को ट्रेनिंग देने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद स्कूल में कई कार्यक्रम हुए। परिणाम स्वरूप शहर के गर्ल्स स्कूलों में इस सरकारी स्कूल को विशेष दर्जा मिला।

 

अंग्रेजी के लिए लगाईं अलग से कक्षाएं

कहने को जहांगीराबाद का शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय हिंदी मीडियम  स्कूल है, लेकिन यहां कई छात्राएं फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करती नजर आ जायेंगी। डॉ. खरे ने अंग्रेजी को बढ़ावा देने के लिए स्कूल में विशेषज्ञों की सलाह ली। अंग्रेजी विषय को शामिल किया और विशेष कक्षाएं लगाईं गईं। कई बच्चों ने अंग्रेजी माध्यम में यहां से शिक्षा पाई। अब भी यह सिलसिला चल रहा है।

संवर गया कई लड़कियों का भविष्य

डिजिटल शिक्षा कार्यक्रम के परिणाम स्वरूप स्कूल की चार सौ लड़कियों को माइक्रोसॉफ्ट प्रमाणन मिला है। इनमें से कई बच्चियां अब बेहतर पदों पर नौकरी कर रही हैं। यहां की एक छात्रा प्रदेश की पहली महिला फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट बनी है। इसके साथ ही कई रोजगार मूलक आयोजन स्कूल में चलाए जा रहे हैं। इसका फायदा कई बालिकाओं को हुआ है।

संदर्भ स्रोत : पत्रिका 

संपादन: मीडियाटिक डेस्क

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