अपनी अलग पहचान बनाने वाली उषा मंगेशकर

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अपनी अलग पहचान बनाने वाली उषा मंगेशकर

चित्रांकन : ज़ेहरा कागज़ी

विशिष्ट महिला 

उषा जी का जन्म 15 दिसम्बर 1935 को इंदौर में हुआ था, लेकिन उनकी परवरिश मुंबई में हुई। अपने करियर की शुरूआत 1954 में वी शांताराम की फिल्म “सुबह का तारा” के गाने “बड़ी धूमधाम से मेरी भाभी आई” से की थी। गायकी का उनका सफ़र बहुत उतार चढ़ाव से भरा रहा। इसके बाद 1963 में ईगल फ़िल्म्स के बैनर तले बनी एफ़ सी मेहरा की फिल्म शिकारी में उन्हें लता जी के साथ  “तुमको पिया दिल दिया कितने नाज़ से” गाने का मौका मिला। अजीत और रागिनी अभिनीत इस फ़िल्म का यह सब से मशहूर गीत साबित हुआ, जिसे हेलन और रागिनी पर फिल्माया गया था। दोनों  ने बेहतरीन नृत्य किया। फ़ारुख़  क़ैसर के लिखे और जी एस कोहली के लाजवाब संगीत से सजे इस गीत का शुमार सर्वाधिक कामयाब ‘फ़ीमेल डुएट्स’ में होता है। “तुम को पिया दिल दिया कितने नाज़ से” गीत की कामयाबी का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इस गीत के बनने के 40 साल बाद, इस गीत का रीमिक्स बना और वह भी ख़ूब चला। लेकिन अफ़सोस कि इस गीत के मूल संगीतकार को न तो इसका कोई श्रेय मिल सका और न ही उस समय उन्हें किसी फ़िल्मकार ने उन्हें किसी बड़ी फ़िल्म में अवसर दिया। उषा जी को भी इस फिल्म से कोई फ़ायदा नहीं हुआ। उन्हें कामयाबी के लिए 1975 तक इंतज़ार करना पड़ा।

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ऐसा माना जाता है, कि अपनी बड़ी बहनों – लता और आशा के वर्चस्व को देखते हुए उन्होंने अपने आपको मराठी सिनेमा तक अपने को सीमित कर रखा था,लेकिन उषा जी के करियर में जो एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, वह लताजी के ही कारण आया। दरअसल संगीतकार सी. अर्जुन ने एक बार लताजी से कहा, कि वे जय संतोषी माँ फिल्म में संगीत दे रहे हैं और उनकी इच्छा है, कि लता जी इस फिल्म में गाएं। इस पर लताजी ने कहा, कि उच्चारण की दृष्टि से हिन्दी में सबसे मुश्किल अक्षर ‘ष’ है और संतोषी मां में बार-बार ‘ष’ आने पर उन्हें दिक्कत होगी। यह सुनकर सी.अर्जुन ने कहा कि कोई बात नहीं, फिर में आशा जी से ही गवा लेता हूँ। जवाब में लताजी ने कहा, यही दिक्कत आशा के साथ भी हो सकती है। बेहतर होगा, तुम उषा से गवाओ, क्योंकि जिस व्यक्ति के नाम में ही ‘ष’ अक्षर आता है, उसकी ज़बान संतोषी माता गाते वक्त हरगिज नहीं फिसल सकती। इस तरह उषा जी को यह फिल्म मिली और इसकी सफलता का उन्हें फ़ायदा भी हुआ। इस फिल्म के “मैं तो आरती उतारूं” गाने ने उषा जी को फिल्म फेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक (महिला ) सम्मान के लिए नामित कराया । अनेक भक्ति गीतों को उषा जी ने अपनी आवाज़ दी है। लेकिन दूसरी तरफ  “धागला लगली कड़ा” और “मुंगड़ा-मुंगड़ा” जैसे सुपरहिट गीत भी उनके कहते में दर्ज हैं। दिलीप कुमार-मीना कुमारी अभिनीत फिल्म “आज़ाद” का गाना ‘‘अपलम चपलम’’ और बासु चटर्जी की फिल्म “खट्टा-मीठा” का टाइटल सॉन्ग भी खासे लोकप्रिय रहे हैं। अपनी बड़ी बहनों की तरह  बंगाली, मराठी, कन्नड़, नेपाली, भोजपुरी, गुजराती और असमिया समेत कई भाषाओं में भी उन्होंने कई सुपरहिट गाने गाए हैं। उन्होंने दूरदर्शन के लिए संगीत नाटक फूलवंती का भी निर्माण किया है।

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उषा जी का कहना है कि हम पांच भाई-बहन को पिता से सुर और मां से अच्छा व्यवहार करने की शिक्षा मिली। लता दीदी से मार्गदर्शन मिला। उनसे सुर ताल को सीखा। लता दीदी और आशाताई दोनों ने अपना स्थान बना रहे थे, उन्हें देखकर मैं सीख रही थी। यह सुखद संयोग ही है कि महाराष्ट्र सरकार ने जिस दिन उषा जी को लता मंगेशकर पुरस्कार देने की घोषणा की,उस दिन लता जी का 91वां जन्मदिन था। वे लता जी के साथ ही रहती हैं, जबकि मीना मंगेशकर व आशा भोंसले एक साथ रहती हैं। जब कभी उनका परिवार मिलता है तो स्वयं के गीतों पर कोई चर्चा नहीं होती। उषा जी का कहना है कि गीतों से अलग भी हमारी ज़िंदगी है। आशा दीदी खाना अच्छा बनाती हैं तो सभी उसका लुत्फ़ लेते हैं। लता दीदी भी खाना बनाने में सहयोग करती हैं। हां, इस दौरान अन्य पार्श्व गायकों की गायकी को लेकर अवश्य चर्चा हो जाती है। आज के समय में उन्हें शंकर महादेवन और श्रेया घोषाल की गायकी पसंद है। उषा जी को चित्रकारी का भी शौक़ है। यह कला उन्होंने अपनी माँ को चित्र बनाते देखकर सीखी। उन्होंने एक बार जल रंगों से शिवाजी गणेशन का पोर्ट्रेट बनाकर उन्हें भेंट किया। उस समय जर्मनी से आये एक प्रतिनिधि मंडल ने भी उस पोर्ट्रेट की बहुत तारीफ़ की।

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पुरस्कार और नामांकन
जय संतोष माँ (1975) के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका के लिए बीएफजेए अवॉर्ड्स, जय संतोषी माँ  (1975) सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका के लिए फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार के लिए मनोनीत, इंकार (1977) “मंगता है तो रसिया ” गीत के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका के लिए फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार के लिए मनोनीत, इकरार (1980) “हमसे नज़र तो मिलाओ” के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका के लिए फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार के लिए मनोनीत, गुजरात सरकार द्वारा स्थापित पहला ताना-रिरि पुरस्कार, हिंदुस्तान ज़िंक लिमिटेड का लाइफ टाइम अचीवमेन्ट अवॉर्ड (2019). महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्थापित गान साम्राज्ञी लता मंगेशकर पुरस्कार (2020-21 के लिए)

संदर्भ स्रोत – विकिपीडिया, स्वप्निल संसार डॉट ऑर्ग, दैनिक भास्कर

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