ओडिशा हाईकोर्ट : शादीशुदा महिला को ससुराल या

blog-img

ओडिशा हाईकोर्ट : शादीशुदा महिला को ससुराल या
मायके में रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता

उड़ीसा हाईकोर्ट ने पिछले दिनों एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी बालिग महिला को उसके माता-पिता या ससुराल पक्ष द्वारा जबरन अपने साथ रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह टिप्पणी उस समय की जब एक मां द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका को खारिज किया गया, जिसमें अपनी विवाहित बेटी के ठिकाने का पता लगाने की मांग की गई थी, जो लंबे समय से परिवार से अलग रह रही थी।

अदालत ने कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो किसी बालिग बेटी को उसके मायके या ससुराल में रहने के लिए मजबूर करने की अनुमति देता हो। यदि कोई बालिग महिला स्वतंत्र रूप से रहने का निर्णय लेती है, तो उसे ऐसा करने से रोकने के लिए कोई कानूनी बाधा नहीं है।

सुरक्षा को लेकर चिंता

याचिका के अनुसार, महिला अपनी इच्छा से ससुराल का घर छोड़कर किसी दूर स्थान पर रह रही थी। उसके वैवाहिक विवाद से जुड़ा मामला फिलहाल सिविल कोर्ट में लंबित है। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2024 में महिला पुलिस के सामने पेश हुई थी और उसने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह न तो अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती है और न ही ससुराल में। हालांकि याचिकाकर्ता मां का कहना था कि एक वर्ष से अधिक समय से बेटी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है और उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता है।

हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि महिला को कहीं भी अवैध रूप से बंधक बनाकर नहीं रखा गया है। चूंकि वह बालिग है और अपनी इच्छा से अलग रह रही है, इसलिए अदालत ने हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने महिला का पता लगाने और जानकारी देने की मांग वाली हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि कानून एक बालिग महिला को अपने जीवन और निवास से जुड़े निर्णय स्वतंत्र रूप से लेने का अधिकार देता है।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट : लिव-इन
अदालती फैसले

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट : लिव-इन , रिलेशनशिप से माता-पिता के सम्मान को ठेस

पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे एक जोड़े की पुलिस सुरक्षा याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे संबंधों...

पहली पत्नी को तलाक दिए बिना मुस्लिम और
अदालती फैसले

पहली पत्नी को तलाक दिए बिना मुस्लिम और , हिंदू दोनों नहीं कर सकते दूसरी शादी

विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह करने वाला मुस्लिम व्यक्ति भी पहली पत्नी को कानूनी तलाक दिए बिना दूसरी शादी नहीं कर सकता...

सुप्रीम कोर्ट : अनुकंपा नियुक्ति में विवाहित बेटियों को भी समान अधिकार
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : अनुकंपा नियुक्ति में विवाहित बेटियों को भी समान अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाहित बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से बाहर नहीं रखा जा सकता। न्यायालय ने इसे समानता और संवैधानि...

दिल्ली हाईकोर्ट : आपस में क्रूरता के आरोप लगाने पर नहीं मिलेगा सहमति से तलाक
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट : आपस में क्रूरता के आरोप लगाने पर नहीं मिलेगा सहमति से तलाक

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी द्वारा एक-दूसरे पर क्रूरता के आरोप लगाने की स्थिति को आपसी सहमति से तलाक नहीं माना ज...

मप्र हाईकोर्ट : पहली शादी छुपाकर की दूसरी
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट : पहली शादी छुपाकर की दूसरी , शादी, फिर भी महिला को मिलेगा भरण-पोषण

हाईकोर्ट ने विवादित दूसरी शादी मामले में महिला को अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया