इलाहाबाद हाईकोर्ट : भरण-पोषण न देने

blog-img

इलाहाबाद हाईकोर्ट : भरण-पोषण न देने
पर जेल जाने से खत्म नहीं होती देनदारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी या बच्चों को भरण-पोषण न देने पर किसी व्यक्ति को जेल भेजे जाने से उसकी आगे की मासिक देनदारी या बकाया भुगतान की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने हसीना खातून की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। 

2019 में मुरादाबाद जिला अदालत के मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पति को पत्नी और दिव्यांग बेटे को चार-चार हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। पति ने भुगतान नहीं किया, जिससे 2,64,000 रुपये बकाया हो गए। इस पर पत्नी ने वसूली अर्जी दी, जिसके बाद पति को गिरफ्तार कर 30 दिन के लिए जेल भेज दिया गया।

जेल से रिहा होने के बाद भी भुगतान न करने पर पत्नी ने फिर से वसूली के लिए आवेदन किया। लेकिन, ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि पति पहले ही 30 दिन की सजा काट चुका है। इसलिए अब वसूली नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए बकाया राशि की वसूली का नया आदेश पारित करने के निर्देश दिए। साथ ही बकाया रकम पर छह प्रतिशत साधारण ब्याज देने को भी कहा। 

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



सुप्रीम कोर्ट : सेना में महिला अधिकारियों
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : सेना में महिला अधिकारियों , को मिलेगा परमानेंट कमीशन

प्रणालीगत भेदभाव पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी -कोर्ट ने माना कि महिलाओं के साथ लंबे समय से सिस्टम में भेदभाव हुआ जिससे उनके...

दिल्ली हाईकोर्ट : दिल का टूटना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट : दिल का टूटना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं

महिला ने कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा था, जिसमें अपीलकर्ता को दोषी ठहराया गया हो या इतना बड़ा कदम उठाने की कोई वजह बताई गई...

सुप्रीम कोर्ट : गोद लेने वाली महिला को भी मातृत्व अवकाश का हक
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : गोद लेने वाली महिला को भी मातृत्व अवकाश का हक

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा- मातृत्व संरक्षण एक मूलभूत मानवाधिकार है. 

कर्नाटक हाईकोर्ट : दूसरी महिला के साथ
अदालती फैसले

कर्नाटक हाईकोर्ट : दूसरी महिला के साथ , लिव-इन में रहना शादी नहीं

हाई कोर्ट ने इसी के साथ दूसरी महिला और उसके बच्चों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को भी रद्द कर दिया है। 

जबलपुर हाईकोर्ट :   'परंपरा' का हवाला देकर
अदालती फैसले

जबलपुर हाईकोर्ट :   'परंपरा' का हवाला देकर , बहुविवाह को वैध नहीं ठहराया जा सकता

कोर्ट ने कहा कि ऐसे दावे के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। केवल आदिवासी परंपरा का हवाला देकर किसी महिला को पति की संपत्ति या...