पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट  : दोबारा विवाह कर सकते हैं,

blog-img

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट  : दोबारा विवाह कर सकते हैं,
लेकिन तलाक का आदेश रद्द नहीं हो सकता

चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक गजब का मामला देखने को मिला है। दरअसल एक तलाकशुदा पति-पत्नी को तलाक के बाद अपनी गलती का अहसास हुआ जिसके बाद उन्होंने फैमिली कोर्ट के आदेश को खारिज करने के लिए याचिका दायर की थी जिसको हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगर साथ रहना चाहते हैं तो दोबारा शादी करने पड़ेगी।

पति-पत्नी ने वैवाहिक विवाद के चलते फैमिली कोर्ट में आपसी सहमति से तलाक ले लिया था, लेकिन बाद में उनको अपनी गलती का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने साथ रहने के रहने के लिए फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश को रद्द करने की पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से गुहार लगाई। हाईकोर्ट ने उनकी अपील को खारिज करते हुए कहा कि वे दोबारा विवाह कर सकते हैं, लेकिन तलाक का आदेश रद्द नहीं हो सकता।

कोर्ट ने इस वजह से खारिज किया अपील

हाईकोर्ट ने माना कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से विवाह विच्छेद के खिलाफ अपील इस आधार पर स्वीकार्य नहीं होगी कि युगल फिर से पति-पत्नी के रूप में साथ रहना चाहता है। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने कहा कि पक्षकारों को बाद में अपने शपथ पत्र वापस लेने और सुलह की इच्छा जताने की अनुमति देना, यह कहकर कि उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया है और अब वे साथ रहना चाहते हैं, कोर्ट की अवमानना और झूठी गवाही के बराबर होगा। इसके अतिरिक्त यह व्यवहार कोर्ट के अधिकार को कमजोर करेगा। पीठ ने कहा कि चूंकि अब पक्षों को अपनी गलती का अहसास हो गया है और वे साथ रहना चाहते हैं, इसलिए अधिनियम की धारा 15 के अनुसार उन्हें फिर से विवाह करने की अनुमति है। अधिनियम में उन पक्षों के पुनर्विवाह पर कोई रोक नहीं है, जिन्होंने तलाक लिया है।

फिर से कर सकते हैं विवाह

कोर्ट ने इस प्रश्न पर विचार किया कि क्या अधिनियम की धारा 13-बी के अंतर्गत आपसी सहमति से विवाह को समाप्त करने के विरुद्ध अपील की जा सकेगी, जबकि तलाक सहमति से है। सीपीसी की धारा 96(3) के तहत पक्षों की सहमति से न्यायालय द्वारा पारित तलाक के विरुद्ध कोई अपील नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने कहा कि अधिनियम की धारा 15 के प्रविधान के अनुसार, जब विवाह तलाक की डिक्री द्वारा विघटित हो जाता है और डिक्री के खिलाफ अपील का कोई अधिकार नहीं होता है या अपील प्रस्तुत की गई है, लेकिन खारिज कर दी गई है तो किसी भी पक्ष के लिए फिर से विवाह करना वैध होगा।

संदर्भ स्रोत : दैनिक जागरण

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



दिल्ली हाईकोर्ट : पासपोर्ट बनवाने के लिए पिता का नाम जरूरी नहीं
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट : पासपोर्ट बनवाने के लिए पिता का नाम जरूरी नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट : पासपोर्ट बनवाने के लिए पिता का नाम जरूरी नहीं

सुप्रीम कोर्ट : शादी से पहले फिजिकल रिलेशन समझ से परे
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : शादी से पहले फिजिकल रिलेशन समझ से परे

जब तक शादी नहीं, तब तक लड़का-लड़की अजनबी.  किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए

हिमाचल हाईकोर्ट : पहले विवाह के बेबुनियाद आरोप से नहीं
अदालती फैसले

हिमाचल हाईकोर्ट : पहले विवाह के बेबुनियाद आरोप से नहीं , रुकेगा हक, पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार

ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए शिकायत खारिज कर दी थी कि महिला का पहले से विवाह था और वह विवाह समाप्त हुए बिना दूसरा विवाह क...

इलाहाबाद हाईकोर्ट : जब कपल खुश, तो
अदालती फैसले

इलाहाबाद हाईकोर्ट : जब कपल खुश, तो , केस चलाना वक्त की बर्बादी

POCSO और रेप केस में बड़ी राहत- हाईकोर्ट ने कहा कि शादी कर साथ रह रहे जोड़े पर POCSO और दुष्कर्म केस जारी रखना उचित नहीं

मप्र हाईकोर्ट : महिला गेस्ट फैकल्टी को मिलेगा मातृत्व अवकाश
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट : महिला गेस्ट फैकल्टी को मिलेगा मातृत्व अवकाश

80 दिन नियम पर हाई कोर्ट सख्त, प्रेग्नेंट महिलाओं को मिलेगा पूरा हक,राज्य नहीं टाल सकता जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट : कोई भी महिला तीन दिनों
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : कोई भी महिला तीन दिनों , के लिए अछूत नहीं मानी जा सकती

सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी वी नागरत्ना ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी...