दहेज के मामलों में महिलाओं की मौत की घटनाओं को समाज पर गहरा धब्बा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानूनी रोक के बावजूद, इस प्रथा के कारण हजारों महिलाएं बेमौत मारी जाती हैं। पीठ ने कहा कि दहेज से जुड़ी मौत जैसे बेहद गंभीर अपराध में उच्च न्यायालय को अपने विवेक का इस्तेमाल करते समय बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए थी।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने दहेज से जुड़ी एक मौत के मामले में एक व्यक्ति की जमानत रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि पटना उच्च न्यायालय का आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश बिल्कुल टिकाऊ नहीं है।
हाईकोर्ट का आदेश अनुचित
पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में हाईकोर्ट द्वारा आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश पूरी तरह से अनुचित और कानून की नजर में टिकने योग्य नहीं है। शीर्ष अदालत ने फैसले में यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में किसी भी बात पर चर्चा नहीं की है और सिर्फ इस बात को ध्यान में रखा कि आरोपी न्यायिक हिरासत में है और अब तक केवल दो गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं।
बेंच ने कहा, दहेज से जुड़ी मौत के मामले वास्तव में एक गहरी शर्मिंदगी और एक बड़ी सामाजिक बुराई हैं, जो मानवाधिकारों और गरिमा का गंभीर उल्लंघन करते हैं। कानूनी रोक के बावजूद, इस प्रथा के कारण हजारों महिलाएं बेमौत मारी जाती है; अक्सर या तो उनकी हत्या कर दी जाती है, या फिर दूल्हे के परिवार की तरफ से पैसे या कीमती चीजों की लालच भरी मांगों के कारण उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया जाता है। दहेज से जुड़ी मौतें समाज पर गहरा धब्बा हैं।
आरोपी बोला आत्महत्या की, महिला के शरीर पर मिले चोट के निशान
आरोपी की तरफ से पेश वकील ने दलील दी कि यह मामला आत्महत्या का है। वकील के अनुसार, मृतका की मानसिक हालत ठीक नहीं थी और कहा जाता है कि उसने एक इमारत की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी। उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर गौर किया कि पीड़िता की शादी आरोपी से डेढ़ साल पहले हुई थी। 1 सितंबर, 2024 को महिला अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थी। उसके शरीर पर अंदरूनी और बाहरी, दोनों तरह की चोटों के निशान थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह सिर में लगी चोट के कारण होने वाला रक्तस्राव और सदमा बताया गया।
आरोपी की दलीलों को ठुकराया
पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजर अंदाज कर दिया, विशेष रूप से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को, जिसमें मृतक के शरीर पर कई चोटों के निशान बताए गए थे। शीर्ष अदालत ने आरोपी की ओर से पेश उन दलीलों को सिरे से ठुकरा दिया, जिसमें कहा गया था कि यह दहेज हत्या का नहीं बल्कि आत्महत्या का मामला है।
आरोपी को आत्मसमर्पण करने का आदेश
पीठ ने कहा कि सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हमारा मानना है कि हाईकोर्ट द्वारा आरोपी को जमानत कर रिहा करने का आदेश देना, पूरी तरह से गलत था। जमानत रद्द करते हुए पीठ ने आरोपी को जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।



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