नई पीढ़ी को मोहिनीअट्टम की

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नई पीढ़ी को मोहिनीअट्टम की
विरासत से जोड़ रहीं कविता शाजी

छाया : कविता शाजी के फेसबुक अकाउंट से 

आज के तेज़-तर्रार संगीत और आधुनिक नृत्य के दौर में जहां बच्चे अक्सर पश्चिमी शैली के नृत्य में अधिक रुचि दिखाते हैं, वहीं शहर की प्रसिद्ध नृत्यांगना कविता शाजी शास्त्रीय नृत्य मोहिनीअट्टम को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में जुटी हैं। उनका मानना है कि बच्चों को यदि सही मार्गदर्शन और विश्वास मिले, तो वे शास्त्रीय कला की गहराई और सौंदर्य को पूरी तरह से समझ सकते हैं।

22 साल से सिखा रही नृत्य की बारीकियां 

कविता शाजी ने पिछले 22 वर्षों से बच्चों को शास्त्रीय नृत्य की बारीकियां सिखाने की न केवल जिम्मेदारी ली है, बल्कि वह इसे एक मिशन मानती हैं। उनका उद्देश्य है कि नृत्य के माध्यम से बच्चों को धैर्य, समर्पण और अनुशासन सिखाया जाए। उनकी एक खास बात यह भी है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को मुफ्त में नृत्य सिखाती हैं। उनका मानना है कि "अगर किसी बच्चे में प्रतिभा है, तो उसकी आर्थिक स्थिति कभी भी उसकी राह में रुकावट नहीं बननी चाहिए।"

बड़ी पहचान बना चुके छात्र

कविता शाजी के विद्यार्थियों में से कई ऐसे हैं, जिन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वे स्टेज पर नृत्य करेंगे। आज, इन बच्चों ने बड़े मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया है और कई ने देश-विदेश में पहचान बनाई है। एक खास उदाहरण के तौर पर, उनकी एक छात्रा ने यूएस के एक प्रमुख कार्यक्रम में प्रस्तुति देकर दर्शकों का दिल जीत लिया।

नृत्य के प्रति विशेष दृष्टिकोण

कविता का मानना है कि शास्त्रीय नृत्य केवल शारीरिक गति नहीं, बल्कि यह एक कला है, जो भावों और मुद्राओं के माध्यम से एक कहानी कहने का माध्यम बनती है। वह बच्चों को यह समझाती हैं कि शास्त्रीय नृत्य न केवल मन को शांति देता है, बल्कि यह अनुशासन, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक विरासत का वाहक भी है। कविता बच्चों को हमेशा यह प्रेरित करती हैं कि शास्त्रीय नृत्य को सिर्फ एक कला के रूप में न देखें, बल्कि इसे अपनी सांस्कृतिक धरोहर मानकर आत्मसात करें। उनके अनुसार, "शास्त्रीय नृत्य को जीवित रखना हमारी जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसे समझ सकें और इस कला के जरिए हमारी संस्कृति को आगे बढ़ा सकें।" अब तक, कविता शाजी ने 2500 से ज्यादा बच्चों को शास्त्रीय नृत्य की शिक्षा दी है। वह मानती हैं कि जब नृत्य सिखाने का उद्देश्य सिर्फ कला का प्रसार नहीं, बल्कि समाज में एक बदलाव लाने का हो, तो सफलता खुद ब खुद मिलती है। 

सन्दर्भ स्रोत : डी बी स्टार 

सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क 

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