राजस्थान हाईकोर्ट ने 93 वर्षीय मां और उसकी 70 साल की बेटी के बीच लंबे समय से चल रहे संपत्ति विवाद में डीएनए टेस्ट करवाने के निर्देश दिए हैं। विवाद के दौरान मां ने बेटी को अपनी कोख से जन्मी संतान मानने से इनकार कर दिया था। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश बिपिन गुप्ता ने डीएनए टेस्ट करवाने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने यह फैसला 70 साल की बेटी भौंरी देवी की याचिका पर दिया। उन्होंने अपने पिता स्व. श्रीबद्री द्वारा वर्ष 2014 में की गई वसीयत को चुनौती दी थी। यह वसीयत महेंद्र कुमार नामक व्यक्ति के पक्ष में की गई थी। महेंद्र को वसीयत में श्रीबद्री ने अपना पुत्र बताया था। भौंरी देवी ने वसीयत को निरस्त घोषित करने और संपत्ति में हिस्सा देने की मांग की थी।
अधीनस्थ अदालत में मां बिला देवी ने उन्हें बेटी मानने से इनकार कर दिया था। इस पर भौंरी देवी ने डीएनए मिलान की मांग की थी, लेकिन अधीनस्थ अदालन ने इसे खारिज कर दिया था। इस फैसले को भौंरी देवी ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए डीएनए मिलान की मांग की।
मां के वकील प्रह्लाद शर्मा ने डीएनए परीक्षण से निजता प्रभावित होने का तर्क दिया था। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि डीएनए जांच से मातृत्व की सच्चाई सामने आ सकेगी।
कोर्ट ने कहा, जबरन डीएनए जांच के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, लेकिन यदि कोई परीक्षण से इनकार करता है तो न्यायालय परिस्थितियों के आधार पर अनुमान लगा सकती है। डीएनए जांच से निजता प्रभावित होती है लेकिन सत्यता की जानकारी करना न्यायालय का दायित्व है। अब न्यायालय में डीएनए जांच की रिपोर्ट पेश होने के बाद अगली सुनवाई की तारीख तय होगी।



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