मप्र की 5 महिला खिलाड़ी खेलेंगी विमेंस प्रीमियर लीग 

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मप्र की 5 महिला खिलाड़ी खेलेंगी विमेंस प्रीमियर लीग 

आईपीएल की भांति महिलाओं की प्रीमियम लीग (WPL 2026) के ऑक्सन में मध्य प्रदेश की महिला खिलाड़ियों को  लेने के लिए सभी फ्रेंचाइजी ने दिलचस्पी दिखाई। दिल्ली में हुई ऑक्शन में मध्य प्रदेश की 5 महिला खिलाड़ियों को सीजन 2026 के लिए खरीदा गया।  विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) की इस नीलामी में मध्य प्रदेश की कुल 12 महिला खिलाड़ी शामिल हुई। शहडोल की पूजा वस्त्रकार को आरसीबी (रॉयलचैलेंजर्स बेंगलुरु) ने 85 लाख रुपए में खरीदा। उनका बेस प्राइज 50 लाख था। वहीं छतरपुर की क्रांति गौड़ को यूपी वॉरियर्स ने 50 लाख रुपए में खरीदा। उनका बेस प्राइज 50 लाख रुपए ही था। ग्वालियर की अनुष्का शर्मा को गुजरात टीम ने 45 लाख रुपए में चुना। सीधी की संस्कृति गुप्ता को मुंबई ने 20 लाख रुपए में खरीदा। भोपाल की राहिला फिरदौस को मुंबई ने 10 लाख रुपए में खरीदा। 

WPL में पहली बार मध्य प्रदेश की 5 खिलाड़ी 

9 जनवरी से शुरू होने जा रहे इस लीग में इन खिलाड़ियों को अलग-अलग टीमों ने बेहतर परफॉर्मेंस के आधार पर चुना है। यह पहला मौका है जब मध्य प्रदेश की एक साथ 05 खिलाड़ियों का चयन डब्ल्यूपीएल ऑक्शन में हुआ है। इसको लेकर महिलाओं ही नहीं, पूरे मध्य प्रदेश में खुशी की लहर है। मध्य प्रदेश की महिला खिलाड़ियों ने भी साबित कर दिया है कि वह नेशनल और इंटरनेशनल खिलाड़ियों के बीच चमक सकती हैं। 

दो साल पहले पूजा को मिले थे एक करोड़ 90 लाख 

पूजा वस्त्रकार को सबसे बड़ा अवार्ड तो विमेंस प्रीमियर लीग 2023 के ऑक्शन में मिला था, जब उन्हें मुंबई इंडियंस की टीम ने एक करोड़ 90 लाख रुपए में खरीदा था। ये मध्य प्रदेश की किसी भी महिला खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी। 2024 के T20 वर्ल्ड कप के बाद उन्हें जो चोट लगी थी उस कारण से वह टीम से बाहर चल रही थीं। उन्हें इलाज और रिहैब से गुजरना पड़ा, जिसके चलते वह कई आधिकारिक अनुबंध और फ्रेंचाइजी गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकती थीं। चोट के चलते उन्हें विमेंस प्रीमियर लीग 2025 से बाहर रहना पड़ा था। पूजा एक बेहतरीन ऑलराउंडर के तौर पर खुद को स्थापित कर चुकी हैं। उनके इंटरनेशनल करियर की बात करें तो वह 33 वनडे, 72 T20 मैच और और पांच टेस्ट मैच खेल चुकी हैं। 

संस्कृति हैं बेहतरीन ऑलराउंडर 

संस्कृति गुप्ता की बात करें तो ये भी एक बेहतरीन ऑलराउंडर हैं। ये रहने वाली तो सीधे जिले की हैं, लेकिन क्रिकेट की एबीसीडी शहडोल से ही सीखी है। संस्कृति 13 साल की उम्र से ही शहडोल आ गई थी। संस्कृति लेफ्ट हैंड बैटिंग करती हैं और राइट आर्म ऑफ स्पिन बोलिंग करती हैं, अभी वो मध्य प्रदेश की T20 टीम से मैच भी खेल रही हैं। 

घर की छत पर क्रिकेट खेलती थीं अनुष्का 

अभी मध्य प्रदेश सीनियर टीम के लिए खेल रही अनुष्का अब गुजरात जायंट्स के लिए खेलती नजर आएंगीं। ये ग्वालियर की पहली खिलाड़ी हैं जो WPL में खेल रही हैं। अपने बड़े भाई आयुष को 2010 में क्रिकेट खेलता हुआ देखकर उसकी क्रिकेट में रुचि जगी। घर की छत पर ही दोनों बहन-भाई क्रिकेट खेला करते थे। इसके बाद में अनुष्का कंपू के मेला हॉकी स्टेडियम में आयोजित एक कैंप में शामिल होने गई थीं, उस कैंप में लड़कों की टीम थी जिसमें अनुष्का एक मात्र लड़की थीं और उसने उस दौरान क्रिकेट में अपना बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया था। रहा। वर्ष 2017 में अनुष्का मध्य प्रदेश की अंडर-16 टीम में शामिल हुईं और अपने पहले ही टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर का खिताब जीता था। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश और फिर बीसीसीआई की अंडर-19 चैंपियनशिप में कप्तानी की। इन दोनों प्रतियोगिताओं में अनुष्का ने अपने शानदार प्रदर्शन से अपनी टीमों को जीत दिलाई। 

क्रांति गौड़- क्रिकेट खेलने के लिए जूते तक नहीं थे 

छतरपुर जिले के घुवारा गांव की रहने वाली क्रांति गौड़ की किस्मत एक बार फिर से चमक गई है। क्रांति ने हाल ही में महिला वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने 8 मैचों में 9 विकेट झटके और पाकिस्तान के खिलाफ बेहतरीन गेंदबाजी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था। ये वही क्रांति हैं जिनके पास क्रिकेट खेलने के लिए जूते भी नहीं थे। क्रांति ने 2017 में साइंस फूड अकादमी में कोच राजीव पिलखले के साथ प्रशिक्षण शुरू किया था। उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी, जिसके कारण उनके पिता ने मदद मांगी थी। कोच ने बताया कि उस समय क्रांति के जूते फटे हुए थे, जिसके बाद अकादमी ने उन्हें नए जूते उपलब्ध कराए। कोच के अनुसार, क्रांति की गेंदबाजी की गति 120 से 150 किमी/घंटा तक रहती थी, जो महिला क्रिकेटरों में कम देखने को मिलती है।

गली क्रिकेट से सीनियर टीम तक पहुंची राहिला 

विकेट कीपर बल्लेबाज राहिला फिरदौस मध्य प्रदेश टीम की कप्तान हैं। राहिला ने जब गली में क्रिकेट खेलना शुरू किया तो उसे रोका गया, लेकिन वह रुकी नहीं, बल्कि अपनी इच्छा को दबा कर रखा और जब मौका मिला तो उसने साबित कर दिया कि प्रतिभा को दबाया नहीं जा सकता। भोपाल में पुराने शहर के शाहजहांनाबाद की रहने वाली राहिला ने कक्षा 12वीं से एक बार फिर क्रिकेट का बैग उठाया और मैदान का रुख किया। यह बात वर्ष 2018-19 की है। एक ही सत्र में राहिला ने जोरदार प्रदर्शन किया और मप्र की अंडर 19/23 और सीनियर टीम का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद राहिला ने पीछे मुड़कर नहीं देखा तब से वह मप्र की सीनियर टीम की सदस्य है।

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