कबाड़ से कला और रोजगार की मिसाल बनी सीधी की बीना

blog-img

कबाड़ से कला और रोजगार की मिसाल बनी सीधी की बीना

सीधी। मध्यप्रदेश के सीधी शहर की बीना जायसवाल ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह बना सकते हैं। बिना किसी औपचारिक शिक्षा के उन्होंने कबाड़ और बेकार सामग्री को रोजगार का जरिया बनाकर महिला सशक्तिकरण और स्वच्छता के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। 

कबाड़ से तैयार किए आकर्षक उत्पाद 

बीना जायसवाल प्लास्टिक, थर्माकोल, नारियल के खोल, पुराने मटके और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं से आकर्षक सजावटी उत्पाद तैयार करती हैं। उनके प्रमुख उत्पादों में टेडी बेयर, लैंप, पावदान, हैंगिंग पॉट और स्वच्छता संदेश देने वाले मॉडल शामिल हैं। 

उन्होंने पार्कों और सार्वजनिक स्थलों के लिए कृत्रिम पेड़, पुराने मटकों से मानव आकृतियां और स्वच्छता मॉडल भी तैयार किए हैं, जो लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। इन कलाकृतियों के माध्यम से वह पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन और प्लास्टिक प्रदूषण के प्रति जागरूकता फैला रही हैं। 

स्वयं सहायता समूह से बदली जिंदगी 

बीना की जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया जब वह ‘ड्रीम स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ीं। पहले वह घर पर सिलाई-बुनाई तक सीमित थीं, लेकिन अब वह अमरकंटक, भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में अपने उत्पाद बेच रही हैं। उनके समूह में शिक्षित और स्नातक महिलाएं भी शामिल हैं, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नए डिजाइन और तकनीक सीखकर उत्पाद तैयार करती हैं। यह पहल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि सामूहिक विकास का उदाहरण भी पेश कर रही है। 

सालाना एक लाख रुपये तक का मुनाफा

वर्तमान में बीना सालाना लगभग एक लाख रुपये का मुनाफा कमा रही हैं। इस आय से उनके बच्चों की शिक्षा में सुधार हुआ है और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। इस कार्य ने उन्हें आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने का अवसर दिया है। 

उत्पादों की कीमतें 

प्लास्टिक के छोटे गमले: 80 से 150 रुपये 

लकड़ी के गमले: 380 से 500 रुपये

कागज के हैंगर: 50 से 100 रुपये 

साइकिल के टायर से बनी टेबल: 500 से 2000 रुपये 

प्लास्टिक की झाड़ू: 130 रुपये 

अन्य घरेलू सजावटी सामान: 50 से 500 रुपये 

तीन साल में 500 से अधिक ग्राहक

पिछले तीन वर्षों में 500 से अधिक लोग उनके उत्पाद खरीद चुके हैं। अमरकंटक, उमरिया और आसपास के जिलों में भी उनके लगभग 200 ग्राहक हैं। बीना की मेहनत और रचनात्मकता ने उन्हें न केवल रोजगार दिया है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और स्वच्छता अभियान में एक प्रेरणादायक पहचान भी दिलाई है। 

सन्दर्भ स्रोत/छाया : दैनिक भास्कर 

सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



एलीट नेशनल बॉक्सिंग : दीपा और जिज्ञासा सेमीफाइनल में
न्यूज़

एलीट नेशनल बॉक्सिंग : दीपा और जिज्ञासा सेमीफाइनल में

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में मार्टिना लकड़ा ने जीता रजत

क्रिकेटर बनने के लिए कर रहीं संघर्ष शहडोल की आशी
न्यूज़

क्रिकेटर बनने के लिए कर रहीं संघर्ष शहडोल की आशी

 ट्रक ड्राइवर की बेटी प्रैक्टिस करने रोजाना 200 रुपए में 100 किलोमीटर करती है सफर.

वर्मी कम्पोस्ट ने चमकाई भग्गू बाई की जिंदगी
न्यूज़

वर्मी कम्पोस्ट ने चमकाई भग्गू बाई की जिंदगी

जैविक खाद बनी आय का जरिया आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी भग्गू बाई

पैरा ताइक्वांडो नेशनल चैंपियनशिप : चार बार
न्यूज़

पैरा ताइक्वांडो नेशनल चैंपियनशिप : चार बार , की नेशनल चैंपियन बनीं सपना

बेंगलुरु के कोरामंगला स्टेडियम में इंदौर की सपना शर्मा ने किया कमाल, ताइक्वांडो नेशनल चैंपियनशिप 2025-26 में 70 खिलाड़िय...

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स : आरती ने रजत,
न्यूज़

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स : आरती ने रजत, , चांदनी और गुंजन ने जीता कांस्य 

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में मप्र की बेटियों का शानदार प्रदर्शन

सागर की सारा रूस में लहराएंगी भारतीय संस्कृति का परचम
न्यूज़

सागर की सारा रूस में लहराएंगी भारतीय संस्कृति का परचम

एमपी-सीजी में इकलौता चयन NCC के जरिए रूस में तिरंगा लहराएंगी सागर सारा पांडे मां का सपना पूरा करने के लिए रचा इतिहास,