मातृत्व अवकाश को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच ने महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण आदेश सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दो साल से कम अंतर पर भी दूसरी मातृत्व अवकाश ली जा सकती है। राज्य सरकार की वित्तीय हैंडबुक मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 से ऊपर नहीं है।
दो साल से कम अंतर पर भी दूसरी मैटरनिटी लीव संभव
हाईकोर्ट ने कहा कि पहला मातृत्व अवकाश लेने के दो वर्ष के भीतर दूसरे मातृत्व अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती। यदि वित्तीय हैंडबुक और मातृत्व लाभ कानून में कोई विरोधाभास है, तो अधिनियम के प्रावधान प्रभावी होंगे।
वित्तीय हैंडबुक मातृत्व लाभ कानून से ऊपर नहीं
राज्य सरकार ने वित्तीय हैंडबुक के नियम 153(1) का हवाला देते हुए कहा कि दो प्रसूति अवकाश के बीच कम से कम दो वर्ष का अंतर होना चाहिए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मातृत्व लाभ अधिनियम संसद द्वारा बनाया गया लाभकारी कानून है और इसके प्रावधान किसी कार्यपालिका निर्देश या वित्तीय हैंडबुक से ऊपर हैं।
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मनीषा यादव की याचिका और हाईकोर्ट का आदेश
मनीषा यादव की याचिका पर सुनवाई के दौरान 4 अप्रैल 2026 को दिए गए आदेश को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। याची की पहली संतान 2021 में हुई थी और 2022 में दूसरी मातृत्व अवकाश की मांग खारिज की गई थी। अब हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि उन्हें 6 अप्रैल 2026 से 2 अक्टूबर 2026 तक मातृत्व अवकाश दिया जाए।
महिलाओं के अधिकारों में नई स्पष्टता
इस आदेश से महिलाओं को मातृत्व अवकाश के अधिकार में स्पष्टता मिली है। वित्तीय हैंडबुक से ऊपर कानून की प्राथमिकता स्थापित हुई है, जो महिलाओं के लिए बड़ी राहत है।



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