दिल्ली हाईकोर्ट : अवैध संबंध रखने वाली महिला

blog-img

दिल्ली हाईकोर्ट : अवैध संबंध रखने वाली महिला
पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि पति से अलग रह रही महिला के किसी अन्य व्यक्ति से अवैध संबंध हैं तो वह पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं होगी। 

जस्टिस गिरीश कठपाड़िया की बेंच ने इस मामले में वादी पति के हक में फैसला सुनाया है। बेंच ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें संबंधित फैमिली कोर्ट ने आदेश दिए थे कि वह हर माह अपनी पत्नी को दस हजार रुपये अंतरिम गुजारा भत्ते के तौर पर दे। निचली अदालत के इस निर्देश को पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

अंतरिम गुजारा भत्ता देना उचित नहीं: पति की चुनौती याचिका पर विचार करते हुए बेंच ने कहा कि इस मामले में प्रथमदृष्टया साक्ष्य बताते हैं कि प्रतिवादी पत्नी किसी और के साथ संबंधों में है। हालांकि, इस संबंध में अदालत ही अंतिम निर्णय करेगी, लेकिन पति की ओर से पेश तथ्यों के अनुसार पत्नी किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंधों में है। ऐसे में पत्नी को अंतरिम गुजारा भत्ता देना उचित नहीं है।

बेंच ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 125 (4) के तहत कानून कहता है कि पत्नी के किसी अन्य पुरुष के साथ शारीरिक संबंध होने पर वह पति से गुजारा भत्ता पाने की अधिकारी नहीं होगी। बेंच ने यह भी कहा कि इस मामले में साक्ष्य दर्शाते हैं कि पत्नी के अन्य पुरुष के साथ अनैतिक संबंध हैं।

पति ने फोटो और वीडियो पेश किए

अपनी पत्नी के अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंधों को लेकर पति ने हाईकोर्ट के समक्ष फोटो व वीडियो पेश किए। पति का कहना था कि उसने निचली अदालत के समक्ष भी यही सबूत पेश किए थे। बावजूद इसके संबंधित अदालत ने गुजारा भत्ता आदेश पेश कर दिया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड बताते हैं कि निचली अदालत में अवैध संबंधों के सबूत पेश किए जाने पर भी उसने न इन्हें स्वीकार किया और न ही खारिज किया, जबकि इस अहम तथ्य को लेकर निचली अदालत को निर्णय पर पहुंचना चाहिए था। उसके बाद ही गुजारा भत्ता तय किया जाता। लिहाजा निचली अदालत दोबारा इस पर सुनवाई कर निर्णय सुनाए। 

निचली अदालत को वापस भेजा मामला

बेंच ने इस मामले को दोबारा सुनवाई के लिए संबंधित फैमिली कोर्ट के पास वापस भेज दिया है। बेंच ने कहा है कि निचली अदालत नए सिरे से इस मामले में सुनवाई करे। खासतौर पर पति द्वारा पेश साक्ष्यों पर गौर करे। इसके बाद गुजारा भत्ता याचिका पर निर्णय करे। बेंच ने दोनों पक्षों को कहा है कि वह निचली अदालत में 21 जुलाई को पेश हों। वादी पति अपनी दलीलें पेश करे। साथ ही प्रतिवादी पत्नी को अपनी सफाई में जो कहना हो वहीं कहे। 

सन्दर्भ स्रोत : विभिन्न वेबसाइट

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



सुप्रीम कोर्ट : घरों की महिलाएँ सिर्फ घर
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : घरों की महिलाएँ सिर्फ घर , नहीं संभालतीं राष्ट्र-निर्माण भी करती हैं

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सड़क हादसे में गृहिणी की मौत के 25 साल बाद पति को 62.77 लाख रुपये मुआवजा, अन्य मामलों म...

दिल्ली हाईकोर्ट :  बेरोजगार बता बच्चे के खर्च से नहीं बच सकता पति
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट :  बेरोजगार बता बच्चे के खर्च से नहीं बच सकता पति

कोर्ट ने कहा, “अपने खर्चों का प्रबंधन करना प्रतिवादी यानी पति की जिम्मेदारी है।

त्रिपुरा हाईकोर्ट : पिता की मृत्यु के बाद तलाकशुदा
अदालती फैसले

त्रिपुरा हाईकोर्ट : पिता की मृत्यु के बाद तलाकशुदा , पुत्री पारिवारिक पेंशन की हकदार नहीं

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने कहा कि पिता की मृत्यु के बाद तलाक लेने वाली पुत्री पारिवारिक पेंशन की पात्र नहीं होगी।

मप्र हाईकोर्ट : बेटियों को उच्च शिक्षा
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट : बेटियों को उच्च शिक्षा , से वंचित नहीं कर सकता पिता

मप्र हाईकोर्ट ने कहा कहा - महिला सशक्तिकरण हकीकत में हो बेटियों को उच्च शिक्षा से वंचित नहीं कर सकता पिता, पढ़ाई का खर्च...

दिल्ली हाईकोर्ट : तलाक के लिए एक साल
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट : तलाक के लिए एक साल , का इंतजार हर मामले में जरूरी नहीं

दिल्ली हाई कोर्ट ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत तलाक के लिए एक साल की इंतजार अवधि को विशेष परिस्थितियों में माफ करने का अ...

सुप्रीम कोर्ट : कागजों पर जिंदा रिश्ते का कोई अर्थ नहीं
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : कागजों पर जिंदा रिश्ते का कोई अर्थ नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल से अलग रह रहे दंपति का विवाह समाप्त करते हुए मानसिक क्रूरता और टूट चुके वैवाहिक संबंधों को तलाक...