कुलाधिपति के पद तक पहुँचने वाली देश की पहली महिला मृणालिनी देवी पवार

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कुलाधिपति के पद तक पहुँचने वाली देश की पहली महिला मृणालिनी देवी पवार

छाया: भारती सरकार के एफबी अकाउंट से 

मृणालिनी देवी का जन्म 25 जून 1931 को वड़ोदरा के गायकवाड़ राजघराने में हुआ। उनके पिता महाराज प्रताप राव वड़ोदरा के अंतिम शासक थे। उनकी माँ महारानी शांता देवी, प्रताप राव गायकवाड़ की पहली पत्नी थीं। दोनों की आठ संतानें हुईं, आठ भाई बहनों में मृणालिनी देवी दूसरे स्थान पर थीं। गायकवाड़ राजघराने में दो विवाह की परम्परा नहीं थी लेकिन प्रताप राव ने इस परम्परा को तोड़ते हुए सीता देवी से विवाह किया जो पूर्व विवाहिता और तीन बच्चों की माँ थीं। मृणालिनी देवी ने महाराज सयाजी राव विश्वविद्यालय से बीएससी करने के बाद आहार एवं पोषण विषय में अमेरिका के ‘आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। बाद में ‘आहार एवं पोषण’ विषय में उन्होंने अपनी पीएचडी महाराज सयाजी राव विश्वविद्यालय से पूरी की। इसके बाद उसी विश्वविद्यालय में उन्होंने कुलाधिपति बनने तक लगभग 12 वर्ष शिक्षण कार्य किया।

आज़ादी के बाद रियासतों का विलय नवगठित भारतीय गणराज्य में होने लगा लेकिन प्रताप राव गायकवाड इसके ख़िलाफ़ थे। अधिकाँश अन्य रियासतों की तरह वे भी स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखना चाहते थे। मशहूर लेखक द्वय लैरी कॉलिंस और डोमिनिक लेपियर की चर्चित पुस्तक 'फ्रीडम एट मिडनाइट' में दर्ज एक वाक़ये के अनुसार जब तत्कालीन गृह सचिव वीपी मेनन, प्रताप राव के पास विलय सम्बन्धी दस्तावेज लेकर पहुंचे तो प्रताप राव ने दस्तख़त कर तो दिए, लेकिन वे मेनन की बाँहों में फूट-फूटकर रोये थे। दरअसल, प्रताप राव शानो-शौकत की ज़िन्दगी जीते थे, जिसकी वजह से वे भारी कर्ज में दब गए थे। अंतरिम सरकार के ऑडिट में पता चला कि उन्होंने खजाने से कई ब्याज मुक्त कर्ज लिए हैं जिसे चुकाने में वे असमर्थ रहे। 1951 में उन्हने देश निकाला दे दिया गया, जिसके बाद वे इंग्लैण्ड चले गए और वहां से मोनाको में जाकर बस गए। 1956 में उन्होंने सीता देवी को तलाक दे दिया और वापस लन्दन आकर रहने लगे। इधर प्रताप राव की गद्दी पर उनके बड़े बेटे फतेहसिंह गायकवाड़ बैठे। फतेह सिंह चार बार वड़ोदरा के सांसद रहे। इसके अलावा वे शानदार क्रिकेटर भी थे, वे बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष और तैंतीस वर्ष की आयु में बीसीसीआई के अध्यक्ष बन गए थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा 1947 में ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पूरी की।

मृणालिनी देवी का विवाह  सन 1949 में धार रियासत के महाराज आनंद राव पंवार  (चतुर्थ) से हुआ। लेकिन वे एक साल बाद ही सन 1950 में वड़ोदरा चली गईं। हालांकि वर्ष 1980 में पति के देहांत के बाद वे नियमित रूप से धार आने लगीं थीं। वर्ष 1988 में फ़तेह सिंह - जो उनके बड़े भाई और महाराज सयाजीराव विश्वविश्वविद्यालय के कुलाधिपति थे, का निधन हो गया। इसके बाद कुलाधिपति के पद पर मृणालिनी देवी आसीन हुईं और किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय में कुलाधिपति के पद तक पहुँचने वाली देश की पहली महिला बनीं। उस समय विश्वविद्यालय में छात्रों की सख्या 35 हज़ार थी। गुजरात में सयाजीराव विश्वविद्यालय एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय है जहां के कुलाधिपति, प्रदेश के राज्यपाल नहीं, बल्कि पूर्व राजपरिवार के सदस्य ही बनते हैं क्योंकि इस परिवार का विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर उसके उत्थान तक में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। परन्तु इससे मृणालिनी देवी की महत्ता कम नहीं हो जाती। आहार एवं पोषण विषय में उनकी विशेषज्ञा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी गयी। वे शिक्षा और प्रशिक्षण, प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संघ (यूसीएनएनआर) स्विट्जरलैंड  की अध्यक्ष रहीं। इसके अलावा वे खाद्य और पोषण कार्यक्रम समिति, इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर होम इकोनॉमिक्स (आयएफएचएम) फ्रांस की सदस्या भी थीं।

राष्ट्रीय स्तर पर मृणालिनी देवी ने पोषण योजना आयोग, भारत सरकार और इंस्टीटयूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स, नई दिल्ली की अधिशासी समिति मे स्टीयरिंग ग्रुप की सदस्या के रूप में कार्य किया। वे राजीव गांधी इंस्टीटयूट फॉर कंटेम्परेरी स्टडीज़, राजीव गांधी फाउंडेशन, नई दिल्ली का सदस्या भी रहीं। 2 जनवरी 2015 में बड़ोदरा में उनका निधन हो गया। इसके बाद धार स्थित उनकी संपत्ति पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई, क्योंकि वे निःसंतान थीं। लेकिन उनकी वसीयत सामने आने के बाद यह विवाद जल्द ही ख़त्म भी हो गया। अपनी सारी संपत्ति उन्होंने अपनी बहनों और उनके बच्चों के नाम कर दी थी।
 
सन्दर्भ स्रोत : नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर, विकीपीडिया
संपादन: मीडियाटिक डेस्क

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